स्टेट गार्जियनशिप एंड एजुकेशन गारंटी\' (State Guardianship Act) लागू हो: जो बच्चे दस्तावेज़ों की सरकारी सुस्ती के कारण पहली कक्षा की उम्र पार कर चुके हैं, सरकार उनके लिए एक विशेष कानून पास करे। ऐसे बच्चों की कक्षा 12वीं तक की पूरी पढ़ाई की ज़िम्मेदारी (किताबें, यूनिफॉर्म, प्राइवेट या सरकारी स्कूल की पूरी फीस) सरकार कानूनी रूप से खुद वहन करे। सरकार इन बच्चों को शैक्षणिक रूप से गोद ले\nएक दिन की भी देरी\' पर 100% छूट (Zero-Rejection Age Clause) का कानून बने: शिक्षा के अधिकार (RTE) में तुरंत यह संशोधन होना चाहिए कि यदि बच्चा अपनी ज़िंदगी में पहली बार पहली क्लास में दाखिला ले रहा है, तो 7 वर्ष की सीमा के बाद उम्र में कम से कम 3 साल की अतिरिक्त छूट (Relaxation up to 10 years) कानूनी रूप से अनिवार्य हो। उम्र चाहे 7 साल एक दिन हो या 9 साल, अगर क्लास पहली है, तो दाखिला मुफ्त और गारंटेड होना ही चाहिए।\nरिजेक्ट करने वाले स्कूलों पर \'ऑन-स्पॉट\' भारी जुर्माना और एफआईआर: यदि कोई भी स्कूल प्रबंधन 7 वर्ष से एक भी दिन अधिक उम्र होने का बहाना बनाकर पहली कक्षा के बच्चे का आरटीई फॉर्म रिजेक्ट करता है, तो शिकायत के 24 घंटे के भीतर उस स्कूल पर ₹1 लाख का जुर्माना लगे और बार-बार ऐसा करने पर स्कूल की मान्यता तुरंत रद्द की जाए।
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